कैप्टन सरकार के लिए अपने ही बने मुसीबत, कांग्रेस नेताओं ने खोला मोर्चा

 

चंडीगढ़ः सरकार के खिलाफ अगर विपक्ष आरोप लगाए तो कहा जाता है कि यह राजनीति से प्रेरित है। लेकिन अगर सत्ताधारी दल के नेता ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दें तो उसे क्या कहा जाए पंजाब में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा जहां कांग्रेस की सरकार के लिए उसके अपने ही नेता मुसीबत बन गए हैं। एक-दो नहीं, आधा दर्जन नेताओं ने कैप्टन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इन नेताओं का आरोप है कि पंजाब में माफिया राज काम कर रहा है। भ्रष्ट अधिकारी और सत्ताधारी पार्टी के नेता माफिया के आगे नतमस्तक होकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और कानून व्यवस्था का बंटाधार कर रहे हैं। अवैध शराब, जहरीली शराब, ड्रग, केबल, ट्रांसपोर्ट और खनन माफिया सरकारी खजाने को खाली कर चुका है। राज्य सरकार कर्मचारियों की तनख्वाह मैं कटौती कर रही है खजाना खाली है और सरकार के पास केंद्र सरकार के आगे हाथ फैलाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। जिन समस्याओं को मुद्दा बनाकर कांग्रेस ने सत्ता का सफर तय किया, आज वो खुद उन्हीं समस्याओं में उलझ गई है।

पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दूलो ने दावा किया है कि वे मुख्यमंत्री से कई बार माफिया राज को लेकर चेताया, लेकिन उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया। इससे पहले प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी और विधायक परगट सिंह और विधायक अमरिंदर सिंह राजा वडिंग भी पंजाब में चल रहे माफिया राज की बात कर चुके हैं। इसी साल फरवरी महीने में परगट सिंह ने मुख्यमंत्री को बाकायदा पत्र लिखकर माफिया राज की बात की और कहा था कि सरकार अच्छी तरह से काम नहीं कर रही है। इसके अलावा विधायक अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने हाल ही में कहा था कि पिछले 3 साल में राज्य सरकार को 600 करोडं रुपये से ज्यादा राजस्व का चूना लगा है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

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